भारतीय सेना ने नोट छापने का काम युद्ध स्तर पर सँभाल रखा है, तीन शिफ्ट में कर रहे हैं 24 घंटे काम

केंद्र सरकार ने जब से नोटबंदी का फ़ैसला लिया है, तब से हर काम युद्ध स्तर पर हो रहा है. चाहे वह बैंक और एटीएम से पैसे का लेन-देन हो या फिर नोटों की छपाई हो. नोटबंदी से अपने पैसे पाने के लिए और मार्केट में पैसों की कमी की वजह से लोगों में हाहाकार मची है. लेकिन सरकार भी इस कमी को जल्द से जल्द दूर करने के लिए कमर कस चुकी है. नोट छपाई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, ताकि देश के किसी भी नागरिक को खुद के पैसों के लिए दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

नोटबंदी से पहले देश के चार में से दो या तीन प्रिंटिंग प्रेस में ही एक साथ नोट छपाई का काम हुआ करता था. लेकिन सरकार की संजीदगी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस वक़्त कैश का संकट कम करने के लिए देश के चारों प्रिंटिंग प्रेस में नोट छपाई का काम चल रहा है. सबसे खास बात ये है कि सभी प्रिटिंग प्रेस में दो से तीन शिफ्ट में 24 घंटे युद्ध स्तर पर काम हो रहा है. मैसूर की प्रेस में लगातार 24 घंटे 500 और दो हज़ार के नोट छापे जा रहे हैं. छपाई करने वाले स्टाफ की थकान को ध्यान रखते हुए अब सरकार ने इस काम के लिए भारत की सेना को इस काम में लगा रखा है.

सेना के जवान पेपर को मशीन तक पहुंचाने के साथ-साथ मशीन में लोडिंग करने, पैकेजिंग और लोडिंग-अनलोडिंग जैसे तमाम काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, सेना के जवान छपी हुई करंसी के वितरण के दौरान सुरक्षा का काम भी देख रहे हैं.

इन जगहों पर नोटों की छपाई…हो रही है नासिक- नासिक की मशीन 30 साल पुरानी प्रिटिंग मशीन है. इससे रोजाना 500 रुपए के 70 लाख ‌नोट छापे जा रहे हैं. यहां छोटे नोटों को छापने के लिए मध्य प्रदेश के देवास से नॉर्मल से अलग इंक मंगाई गई है. नोट छापने के लिए स्याही की कमी न हो, इसलिए यहां भी तीन शिफ़्ट में 24 घंटे काम हो रहा है. यहां करीब 1600 लोग दो शिफ्ट में 24 घंटे काम कर रहे हैं. यहां पांच सौ के अलावा 100, 50, 20 और 10 के नोट भी छप रहे हैं.

देवास- यहां रोजाना करीब डेढ़ से दो करोड़ नए नोटों की छपाई हो रही है. छोटे नोटों की छपाई यहां न के बराबर हो रही है. यहां वर्कर्स तीन शिफ्ट में 8-8 घंटे काम कर रहे हैं. उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए रिटायर्ड वर्कर्स की भी मदद ली जा रही है.

होशंगाबाद- यहां भी लगातार 24 घंटे पीएम-5 मशीन से 500 के 30 लाख नोट का कागज रोज तैयार हो रहे हैं, जो 150 करोड़ के होंगे. मशीन से अब तक करीब 100 मीट्रिक टन कागज बन गया है. अनुमानत: एक मीट्रिक टन कागज से 500 के करीब 3 लाख नोट (15 करोड़ रुपए) बनते हैं.

अपनी कीमती राय ज़रूर दें, शुक्रिया!

नए अपडेट पाने के लिए फेसबुक पेज ज़रूर Like करें !

loading...
loading...