मध्य प्रदेश में सांप्रदायिक भेंट चढ़े दो पराक्रमी शहीद मुस्लिम, हवलदार अब्दुल हमीद और ब्रिगेडियर उस्मान

शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए मध्य प्रदेश सरकार को यह कैसी विडंबना है वर्तमान सरकार एक-एक करके सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों को हर क्षेत्र से निकालने का एक भी प्रयास खाली नहीं जाने दे रहे. मध्य प्रदेश सरकार की गंदी सांप्रदायिक छुआछूत की भावना पूरी पोस्ट पढ़ें और इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आपका सोया हुआ ज़मीर जाग जाय तो इसको शेयर जरूर करें.

आज फिर से एक बार और शहीद हुए हवलदार अब्दुल हमीद और ब्रिगेडियर उस्मान

आज भोपाल में 14 अक्टूबर 2016 शुक्रवार के दिन एक बहुचर्चित शौर्य स्मारक का उद्घाटन हमारे भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया यह अपने आप में देश का पहला ऐसा स्मारक है जिसमें देश के 280 शहीदों के नाम का उल्लेख उनके चित्र सहित दिया गया है.14671273_1158113604265236_8311164612398301805_n

इसके अलावा 22 पराक्रमी वीरों के नाम के साथ उनकी शौर्य गाथाओं का उल्लेख भी इसमें देखने को मिलेगा, लेकिन बड़े शर्म की बात है कि इस शौर्य स्मारक में भारत के दो पराक्रमी वीर हवलदार अब्दुल हमीद और ब्रिगेडियर उस्मान को इसमें शामिल नहीं किया गया आखिर क्यों ? क्या ये लोग जात से मुस्लिम हैं इसीलिए या इतिहास से मुस्लिम लोगों को मिटाने की साज़िश रची जा रही है ये उसी का एक हिस्सा है ?

यह लोग 1965 के भारत-पाक युद्ध मैं इनकी कुर्बानी है कैसे भूल सकते हैं जब अकेले परमवीर चक्र विजेता हवलदार अब्दुल हमीद ने अकेले ही अपने दम पर पाकिस्तानी सेना के बीचोबीच घुसकर सात पैटर्न टैंकों को ध्वस्त किया था इसके अलावा 1948 के युद्ध में नौशेरा के शेर के रूप में पहचाने जाने वाले परमवीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर उस्मान की हैरतअंगेज प्रेरक कहानियां सुनने को मिलती है. दोनों वीर जवान आज इतिहास से जाति के आधार पर भुला दिए गए.

छुआछूत वाली सरकार की साजिश की भेंट चढ़ गए हांलाकि जब मीडिया ने शौर्य स्मारक के उद्घाटन के समय इस बारे में सांस्कृतिक विभाग के प्रधान सचिव से पूछताछ की तो वे बगले झांकने लगे और उन्होंने अपने आप को संभालते हुए भूल को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि इस भूल को जल्दी ही सुधार लिया जाएगा.