मुस्लिम नहीं अब इस गांव में नहीं फिर भी हिंदुओं ने उनकी ईदगाह और मोहर्रम के ताजियों को सजा के रखा है

कौमी एकता की एक बेहतरीन मिसाल करते पेश करते इस गांव के लोग, देखकर लगता है अभी इंसानियत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. कथित नकली राष्ट्रभक्तों को इस पोस्ट को जरूर पढ़ना चाहिए.

यहाँ मोहर्रम के जुलूस में भारी हुजूम होता है

एक और जहां शिवसैनिकों ने नवाजुद्दीन को उसके अपने ही गांव में रामलीला करने से मना कर दिया और उसका घोर विरोध किया इस टाइप के चिरकुट और देशद्रोही राष्ट्रवादियों को पटना में गया के पास नाना गांव भेज दीजिए. आपको जानकर यह ताज्जुब होगा इस पूरे गांव में कुल 6 परिवार मुस्लिम के हैं लेकिन इस गांव में 2 दर्ज़न से अधिक ताजिये निकलते हैं.

यहाँ मोहर्रम के जुलूस में भारी हुजूम होता है बावजूद इसके के आस-पास के गांव में तक इक्का-दुक्का मुस्लिम ही बसते हैं. यहां के हिंदू भाई लोग बहुत पुरानी परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए हैं जब यहां बहुतायत में मुस्लिम हुआ करते थे, जो जोश ओ जूनून के साथ मोहर्रम का जुलूस और ताजिए निकाला करते थे वह तो धीरे-धीरे गांव छोड़कर चले गए लेकिन यहां के स्थानीय निवासियों ने उस परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए है उनकी याद में के बेशक जो लोग चले गए वह बहुत ही नेक लोग थे.

और इतना ही नहीं यह लोग ईद पर ईदगाह को खुद अपने हाथों से सजाते हैं जिस तरह से मुस्लिमों में ईद मनाने को लेकर हर्षोउल्लास होता है बिल्कुल ठीक उसी तरह से इस गांव के लोग बिना किसी भेदभाव और जात की परवाह किए हुए एक दुसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं.

इस लेख को इस वेबसाइट में प्रकाशित करने का मेरा एक ही मकसद है कि यही मानव जीवन है हमेशा जाति और धर्म से ऊपर उठकर सोचा बहुत अच्छा दिखाई देगा लोगों के साथ मिलकर रहिए और अपने जीवन में जितना हो सके उतना दूसरों का अच्छा करने की कोशिश करें ईश्वर हमेशा आपके साथ रहेगा नीचे कमेंट बॉक्स में आपके विचार लिख सकते हैं धन्यवाद