Loading...

स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की कैश वेन के ड्राइवर के खाते में आये 9,806 करोड़ रुपये IT डिपार्टमेंट जाँच में जुटे

सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले के बाद से ही देश की बैंकों के अंदर कार्य भार काफ़ी ज़्यादा बढ़ गया है. बैंक कर्मियों द्वारा बिना थके लगातार काम करने के लिए उनकी देश भर में काफ़ी प्रशंसा भी की जा रही है. सिक्के के दूसरी तरफ़ कई ख़बरें इस तरह की भी आई, जिनमें बैंक कर्मियों द्वारा अपने नजदीकी लोगों को कई तरह के फ़ायदे पहुंचाये गये ऐसा कुछ जगहों पर देखने में भी आया है।

इन्हीं मिली-जुली खबरों के बीच अब पंजाब के बरनाला से एक खबर आई है. बरनाला के तर्कशील चौक निवासी टैक्सी ड्राइवर बलविंदर सिंह के अकाउंट में 4 नवंबर को अचानक से 98,05,95,15,12,757 रुपये जमा हो गए. मोबाइल पर आये इतनी बड़ी रकम के जमा होने के मैसेज के तुरन्त बाद बलविंदर बैंक मैनेजर के पास गया।

images

बैंक मैनेजर ने उससे अपनी पासबुक जमा करके चले जाने को कहा. तीन दिन बाद बैंक वालों ने बलविंदर को नई पासबुक दे दी और इस तरह बात टाल दिया गया वैसे भी आये दिन इस तरह की क्लैरिकल मिस्टेक वाली खबरें हम अकसर सुनते रहते हैं।

बलविंदर के किस्से में लेकिन बात यहीं तक नहीं रुकी, शायद किस्मत भी उसे अरबपति बनाने के पीछे पड़ी हो. कुछ दिन बाद ही 19 नवंबर को बलविंदर के खाते में दोबारा करीब 10 खरब रुपये जमा हो गये. इसके बाद बलविंदर ने इस बात की सूचना आयकर विभाग को दे डाली. सोमवार रात 11 बजे तक इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट की दो टीमें स्टेट बैंक पटियाला की स्थानीय शाखाओं में छापे मार रही थी।

बलविंदर सिंह स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की एसडी कॉलेज स्थित शाखा से अपनी टैक्सी में कैश बैंक की मुख्य शाखा तक ले जाने का काम करता है. इस काम के लिए उसे प्रतिदिन 200 रुपये का मेहनताना दिया जाता है. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की एसडी कॉलेज स्थित ब्रांच में पहले उसका सेविंग खाता था, जिसे बाद में उसने जन-धन खाते में कन्वर्ट करवा लिया था.

19 नवंबर को जब दोबारा अकाउंट में इतनी बड़ी रकम फिर से आ गई तो, बलविंदर मैनेजर रविंदर कुमार के पास गया. इस बार बैंक मैनेजर ने उसे लताड़ दिया और उसकी गाड़ी की सेवाएं भी बैंक के लिए बंद कर दी. इसके बाद इस सारे मामले की जानकारी बलविंदर ने इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट को दे डाली।

download-1

इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि उसके अकाउंट में पैसे उस ब्रांच से नहीं डाले गये हैं, जहां उसका खाता था, बल्कि डीसी कॉम्प्लेक्स स्थित दूसरी शाखा से डाले गये हैं इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट इस पहेली को सुलझाने में लगा है कि एक बार गलती से पैसे ट्रांसफर हो गये, लेकिन दोबारा यह सब कैसे हुआ. इसके साथ ही दूसरी ब्रांच से पैसे किसने डाले यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है.

नोटबंदी के बाद से ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहां जन-धन खातों का इस्तेमाल ब्लैक मनी को वाइट मनी में कन्वर्ट करने के लिए किया गया. टैक्सी ड्राइवर के पास बिना उसके संज्ञान के इस तरह इतनी बड़ी राशि के जमा होने के पीछे असली वजह क्या थी, यह तो अब इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा.

नए अपडेट पाने के लिए फेसबुक पेज ज़रूर Like करें !

Loading...
loading...